आपदा प्रबंधन
भारत सरकार की सिफारिशों के आधार पर रोहतक प्रशासन द्वारा दिनांक 09-10-2007 की अधिसूचना के माध्यम से जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का गठन किया गया। जिला प्रशासन प्रभावी योजना निर्माण तथा आपदा रोकथाम एवं शमन पर विशेष बल देता है। उचित शमन उपायों से खतरों को आपदा में बदलने से रोका जा सकता है तथा संवेदनशील जनसंख्या की सामना करने की क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। इसके लिए व्यवस्थित योजना एवं समन्वय आवश्यक है ताकि आपदा जोखिम न्यूनीकरण (Disaster Risk Reduction – DRR) को निरंतर बढ़ावा दिया जा सके तथा प्रत्येक विभाग की नियमित योजनाओं में सम्मिलित किया जा सके।
7.1 राष्ट्रीय स्तर
राष्ट्रीय स्तर पर भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालय विभिन्न प्रकार की आपदाओं एवं संकट परिस्थितियों के प्रबंधन के लिए उत्तरदायी होते हैं।
आपदा प्रबंधन हेतु नोडल मंत्रालय
- कृषि मंत्रालय – सूखा, बाढ़ एवं भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाएँ।
- पर्यावरण एवं वन मंत्रालय – रासायनिक दुर्घटनाएँ।
- रेल मंत्रालय – रेल दुर्घटनाएँ।
- नागरिक उड्डयन मंत्रालय – विमान दुर्घटनाएँ एवं नागरिक उड्डयन संबंधी आपात स्थितियाँ।
- खान मंत्रालय – खनन दुर्घटनाएँ।
राष्ट्रीय स्तर पर संकट प्रबंधन
- संबंधित मंत्रालय का सचिव सामान्यतः राष्ट्रीय स्तर की संकट प्रबंधन समिति का अध्यक्ष होता है।
- समिति में आपदा प्रतिक्रिया एवं पुनर्वास से संबंधित केंद्रीय एजेंसियों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं।
- गंभीर आपदा की स्थिति में केंद्रीय संकट प्रबंधन समिति की अध्यक्षता कैबिनेट सचिव द्वारा की जाती है।
- आपदा की प्रकृति के अनुसार संबंधित नोडल मंत्रालय में नियंत्रण कक्ष स्थापित किया जाता है।
7.2 राज्य स्तर
राज्य स्तर पर राज्य सरकार के विभिन्न विभाग विभिन्न प्रकार की आपदाओं एवं संकट परिस्थितियों के प्रबंधन हेतु नोडल एजेंसियों के रूप में कार्य करते हैं।
राज्य स्तर पर नोडल प्राधिकारी
- राज्य राहत आयुक्त / राजस्व विभाग के सचिव – प्राकृतिक आपदाएँ।
- श्रम सचिव – औद्योगिक दुर्घटनाएँ।
- गृह सचिव – रेल दुर्घटनाएँ।
राज्य संकट प्रबंधन समूह
- गंभीर आपदाओं की स्थिति में राज्य संकट प्रबंधन समूह की अध्यक्षता मुख्य सचिव द्वारा की जाती है।
- इस समूह में संबंधित विभागों एवं एजेंसियों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं।
- यह समूह आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास कार्यों में विभिन्न विभागों के बीच समन्वय सुनिश्चित करता है।
7.3 जिला स्तर
जिला स्तर पर कलेक्टर / उपायुक्त आपदा प्रतिक्रिया एवं पुनर्वास गतिविधियों के मुख्य समन्वयक के रूप में कार्य करता है। जिले का मुख्य प्रशासनिक अधिकारी होने के कारण वह विभिन्न राज्य सरकारी विभागों के जिला स्तरीय कार्यालयों पर समग्र नियंत्रण रखता है।
जिला स्तर पर मुख्य कार्य
- आपदा प्रतिक्रिया एवं पुनर्वास कार्यों का समन्वय।
- विभिन्न सरकारी विभागों के बीच सहयोग सुनिश्चित करना।
- राहत सहायता की स्वीकृति एवं वितरण।
- राहत एवं ग्रामीण विकास कार्यों हेतु वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना।
- गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) से सहयोग प्राप्त करना।
प्रशासनिक संरचना
- जिला स्तर पर समन्वित आपदा प्रतिक्रिया हेतु कोई औपचारिक समिति नहीं होती, फिर भी कलेक्टर विभिन्न विभागों के अधिकारियों की एक अनौपचारिक टीम का प्रभावी नेतृत्व करता है।
- राजस्व विभाग के विभिन्न स्तरों के अधिकारियों को आवश्यकतानुसार राहत स्वीकृत करने की शक्तियाँ प्रदान की गई हैं।
औद्योगिक एवं रासायनिक आपदा प्रबंधन
औद्योगिक दुर्घटनाओं एवं खतरनाक रसायनों से संबंधित मामलों के लिए भारत सरकार ने पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के अंतर्गत विभिन्न नियम बनाए हैं।
महत्वपूर्ण प्रावधान
- खतरनाक रसायनों एवं मेजर एक्सीडेंट हैज़र्ड (MAH) इकाइयों की पहचान।
- खतरनाक स्थलों की अधिसूचना।
- MAH इकाइयों का सुरक्षा ऑडिट।
- ऑन-साइट एवं ऑफ-साइट आपातकालीन योजनाओं की तैयारी।
संबंधित नियम
- Manufacture, Storage and Import of Hazardous Chemicals (MS&IHC) Rules, 1989
- Chemical Accidents (Emergency Planning, Preparedness and Response) Rules, 2000
इन नियमों के अंतर्गत निम्न स्तरों पर संकट प्रबंधन समूहों के गठन का प्रावधान किया गया है:
- राष्ट्रीय स्तर
- राज्य स्तर
- जिला स्तर
- स्थानीय स्तर
आपदा प्रबंधन संरचना को सुदृढ़ बनाने की आवश्यकता
विभिन्न आपदाओं के अनुभव से यह स्पष्ट हुआ है कि वर्तमान आपदा प्रबंधन संरचना कई बार आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित एवं समन्वित प्रतिक्रिया देने में सक्षम नहीं रही है।
सरकारी पहल
- भारत सरकार ने राष्ट्रीय, राज्य एवं जिला स्तर पर आपदा प्रबंधन योजनाओं की सिफारिश हेतु एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया।
- इस समिति की अध्यक्षता श्री जे. सी. पंत, पूर्व सचिव, कृषि मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा की गई।
समिति के उद्देश्य
- आदर्श आपदा प्रबंधन योजनाओं की तैयारी।
- प्रभावी आपदा प्रबंधन संगठनात्मक संरचना का विकास।
- आपदा तैयारी, प्रतिक्रिया, पुनर्वास एवं शमन प्रणाली को सुदृढ़ बनाना।
वर्तमान ढांचा जिला स्तर पर आपदाओं एवं आपातकालीन परिस्थितियों के सभी चरणों के प्रभावी प्रबंधन हेतु एक सक्षम संगठनात्मक संरचना स्थापित करने का प्रयास करता है।