उपायुक्त

उपायुक्त / जिला प्रशासन की भूमिका

1. सामान्य प्रशासन

  • जिले में सामान्य प्रशासन का प्रमुख उपायुक्त होता है।
  • वह आयुक्त, रोहतक मंडल, रोहतक के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करता है।
  • राज्य सरकार के आदेश एवं निर्देश मंडलायुक्त के माध्यम से उपायुक्त तक पहुँचते हैं।
  • उपायुक्त एक साथ तीन भूमिकाएँ निभाता है:
    1. उपायुक्त
    2. जिला मजिस्ट्रेट
    3. कलेक्टर

2. उपायुक्त के रूप में कार्य

उपायुक्त जिले का मुख्य कार्यकारी अधिकारी होता है। उसकी प्रमुख जिम्मेदारियाँ निम्नलिखित हैं—

प्रशासनिक कार्य

  • जिले के समस्त प्रशासनिक कार्यों की निगरानी।
  • विभिन्न विभागों के कार्यों में समन्वय स्थापित करना।
  • सरकारी योजनाओं एवं नीतियों का क्रियान्वयन सुनिश्चित करना।

पंचायती राज में भूमिका

  • पंचायतों एवं पंचायत समितियों के कार्यों की निगरानी।
  • नगरपालिकाओं, मार्केट कमेटियों एवं सुधार ट्रस्टों का मार्गदर्शन।
  • स्थानीय निकायों की समस्याओं एवं कठिनाइयों का समाधान।

3. जिला मजिस्ट्रेट के रूप में कार्य

जिला मजिस्ट्रेट जिले में कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने के लिए उत्तरदायी होता है।

मुख्य दायित्व

  • कानून एवं शांति व्यवस्था बनाए रखना।
  • सुरक्षा उपायों का क्रियान्वयन।
  • दंड प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत न्यायिक शक्तियों का प्रयोग।

सहयोगी अधिकारी

  • उपमंडल अधिकारी (नागरिक)
  • तहसीलदार
  • नायब तहसीलदार
  • पुलिस अधीक्षक

पुलिस अधीक्षक जिले में पुलिस बल का नेतृत्व करता है तथा जिला मजिस्ट्रेट की सहायता करता है।


4. कलेक्टर के रूप में कार्य

कलेक्टर जिले के राजस्व प्रशासन का प्रमुख अधिकारी होता है।

प्रमुख कार्य

  • भूमि राजस्व की वसूली।
  • सरकारी बकाया राशि की वसूली।
  • राजस्व प्रशासन की निगरानी।
  • राजस्व संबंधी मामलों में सर्वोच्च जिला स्तरीय प्राधिकारी के रूप में कार्य करना।

सहयोगी अधिकारी

  • उपमंडल अधिकारी
  • तहसीलदार
  • नायब तहसीलदार
  • कानूनगो
  • पटवारी

ये अधिकारी राजस्व संबंधी कार्यों में कलेक्टर की सहायता करते हैं।